अत्र ये द्वे विहिते तयोः पूर्वोऽभ्याससंज्ञः स्यात्।
३९५- पूर्वोऽभ्यासः। पूर्वः प्रथमान्तम्, अभ्यासः प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। द्वित्व करने पर दो हो जाते हैं।
इन छठवें अध्याय के सूत्रों से द्वित्व होने पर जो दो-दो बार उच्चारित हो रहे हैं, उनमें पूर्व का रूप अभ्याससंज्ञक होता है।
भूव् को द्वित्व होने पर भूव् भूव् हुआ तो पूर्व भूव् की अभ्याससंज्ञा हुई।