Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 392
णलाद्यादेशविधायकं विधिसूत्रम्
परस्मैपदानां णलतुसुस्थलथुसणल्वमाः
Aṣṭādhyāyī 3.4.82
Vṛtti Varadarājācārya

लिटस्तिबादीनां नवानां णलादयः स्युः। भू अ इति स्थिते।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

३९२- परस्मैपदानां णलतुसुस्थलथुसणल्वमाः। णल् च अतुश्च, उश्च, थल्च, अथुश्च, अश्च, णल् च, वश्च मश्च तेषामितरेतरद्वन्द्वः। परस्मैपदानां षष्ठ्यन्तं णलतुसुस्थलथुसणल्वमाः प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में लिटस्तझ्योरेशिरेच् से लिटः की अनुवृत्ति आती है।

लिट् लकार के स्थान पर आदेश हुए तिप् आदि नौ प्रत्ययों के स्थान पर क्रमशः णल्, अतुस्, उस्, थल्, अथुस्, अ, णल्, व, म आदेश होते हैं।

इस प्रकार से तिप् के स्थान पर णल्, तस् के स्थान पर अतुस्, झि के स्थान पर उस्, सिप् के स्थान पर थल्, थस् के स्थान पर अथुस्, थ के स्थान पर अ, मिप् के स्थान पर णल्, वस् के स्थान पर व और मस् के स्थान पर म आदेश होते हैं।