लादेशाः परस्मैपदसंज्ञाः स्युः।
३७६- लः परस्मैपदम्। लः षष्ठ्यन्तं, परस्मैपदं प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्।
लकार के स्थान पर जो तिप्, तस्, झि आदि आदेश हुए, वे परस्मैपदसंज्ञक होते हैं।
इस सूत्र से तिप् आदि अठारहों की परस्मैपदसंज्ञा की प्राप्ति होती है, इस पर अग्रिम सूत्र तङ्गनावात्मनेपदम् आता है।