कुत्सितोऽश्वोऽश्वकः।
निन्दा अर्थ में विद्यमान प्रातिपदिक या तिङन्त से स्वार्थ में क और अकच् प्रत्यय होते हैं।
अश्वकः। निन्दित घोड़ा। कुत्सितोऽश्वः। अश्व सु से कुत्सिते से क प्रत्यय प्रातिपदिकसंज्ञा, सु का लुक्, एकदेशविकृतन्यायेन प्रातिपदिक मानकर सु होने के बाद उसको रुत्वविसर्ग करके अश्वकः सिद्ध हुआ। इसी तरह कुत्सितो गर्दभः गर्दभकः, कुत्सित उष्ट्र उष्ट्रकः आदि भी बनते हैं।