सप्तम्यन्तं विशेषणञ्च बहुव्रीहौ पूर्वं स्यात्।
अत एव ज्ञापनकाद् व्यधिकरणपदो बहुव्रीहिः।
१६७- सप्तमीविशेषणे बहुव्रीहौ। सप्तमी च विशेषणञ्च तयोरितरेतरयोगद्वन्द्वः सप्तमीविशेषणे। सप्तमीविशेषणे प्रथमान्तं, बहुव्रीहौ सप्तम्यन्तं, द्विपदं सूत्रम्। उपसर्जनं पूर्वम् से पूर्वम् की अनुवृत्ति आती है।
बहुव्रीहिसमास में सप्तम्यन्त शब्द तथा विशेषण शब्द का पूर्व में प्रयोग होता है।
अतः समस्यमान शब्दों में जो शब्द विशेषण बना हुआ है उसका और जो शब्द सप्तमी विभक्ति से युक्त है, उसका पूर्व में प्रयोग करना चाहिए। सप्तमी का पूर्वप्रयोग इस सूत्र से हुआ है, इससे यह ज्ञात होता है कि कभी-कभी बहुव्रीहिसमास में भिन्न-भिन्न विभक्ति वाले पदों का भी समास होता है, केवल समानाधिकरण अर्थात् समान विभक्ति की ही आवश्यकता नहीं।