तद्धितार्थेत्यत्रोक्तस्त्रिविधः सङ्ख्यापूर्वो द्विगुसंज्ञः स्यात्।
९४१- सङ्ख्यापूर्वो द्विगुः। सङ्ख्या पूर्वो यस्य स सङ्ख्यापूर्वः। सङ्ख्यापूर्वः प्रथमान्तं, द्विगुः प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्।
तद्धितार्थोत्तरपदसमाहारे च इस सूत्र में कथित त्रिविध समास में यदि संख्यावाचक शब्द पूर्व पद में हो तो ऐसे समास की द्विगुसंज्ञा होती है।
कर्मधारयसंज्ञा का एक भेद द्विगु है। अतः द्विगु, कर्मधारय के साथ तत्पुरुष भी बना रहता है इसीलिए द्विगु-कर्मधारय को तत्पुरुष का एक भेद माना जाता है।