प्रत्ययान्तेभ्यो धातुभ्यः स्त्रियामकारः प्रत्ययः स्यात्। चिकीर्षा। पुत्रकाम्या।
८६७- अः प्रत्ययात्। अः प्रथमान्तं, प्रत्ययात् पञ्चम्यन्तं, द्विपदं सूत्रम्। स्त्रियां क्तिन् से स्त्रियाम्, भावे, अकर्तरि कारके की अनुवृत्ति है। धातोः, प्रत्ययः और परश्च का अधिकार तो है ही।
स्त्रीत्वविशिष्ट भाव तथा कर्तृभिन्न कारक अर्थ में प्रत्ययान्त धातुओं से अ प्रत्यय होता है।
जब धातुओं से सन्, यङ्, यक्, वयच्, काम्यच् आदि प्रत्यय किये जाते हैं तब धातु प्रत्ययान्त कहलाते हैं। ऐसे धातुओं से स्त्रीत्वविशिष्ट भाव आदि अर्थ में अ प्रत्यय का विधान इस सूत्र से किया जाता है।
चिकीर्षा। कर्तुमिच्छा चिकीर्षा। करने की इच्छा। डुकृञ् करणे। कृ धातु से सन् प्रत्यय करके चिकीर्ष बन चुका है। अतः यह प्रत्ययान्त धातु है। इससे अः प्रत्ययात् से अ प्रत्यय हुआ। अ की आर्धधातुकं शेषः से आर्धधातुकसंज्ञा करके अतो लोपः से चिकीर्ष के अकार के लोप होने पर चिकीर्ष+अ, वर्णसम्मेलन करके चिकीर्ष ही बना। प्रत्यय करने पर भी स्वरूप में तो अन्तर नहीं आया किन्तु धातु से यह कृदन्त प्रातिपदिक बन गया। यह प्रत्यय स्त्रीत्व की विवक्षा में हुआ है। अतः अजाद्यतष्टाप् से टाप् होकर चिकीर्षा बना लिया जाता है। इसके बाद के सुप् का हल्ड्यादिलोप करके चिकीर्षा ही बनता है। आगे चिकीर्षे, चिकीर्षाः आदि रूप बनते हैं।
उपर्युक्त तरीके से सभी धातुओं से यह प्रत्यय हो सकता है। जैसे कि पठ् धातु से सन् करके पिपठिष् से पिपठिषा, वच् धातु से सन् करके विवक्ष् से विवक्षा, सन्नन्त गम् से जिगमिषा, सन्नन्त जीव् से जिजीविषा, सन्नन्त भुज् से बुभुक्षा आदि।
पुत्रकाम्या। आत्मनः पुत्रस्यैषणम्। अपने लिए पुत्र की इच्छा। पुत्र शब्द से काम्यच् प्रत्यय करके सनाद्यन्ता धातवः से धातुसंज्ञा होकर पुत्रकाम्य धातु बना है। अतः यह प्रत्ययान्त धातु है। इससे अः प्रत्ययात् से अ प्रत्यय हुआ। अ की आर्धधातुकं शेषः से आर्धधातुकसंज्ञा करके अतो लोपः से पुत्रकाम्य के अन्त्य अकार के लोप होने पर पुत्रकाम्य+अ, वर्णसम्मेलन करके पुत्रकाम्य ही बना। प्रत्यय करने पर भी स्वरूप में तो यहाँ
भी अन्तर नहीं आया किन्तु धातु से यह कृदन्त प्रातिपदिक बन गया। यह प्रत्यय स्त्रीत्व की विवक्षा में हुआ है। अतः अजाद्यतष्टाप् से टाप् होकर पुत्रकाम्या बना लिया जाता है। इसके बाद हुए सुप् का हल्ड्यादिलोप करके पुत्रकाम्या ही बनता है। आगे पुत्रकाम्ये, पुत्रकाम्याः आदि रूप बनते हैं।