Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 36
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VṛttiGovind
LSK 866
इच्छाशब्दस्य निपातनार्थं विधिसूत्रम्
इच्छा
Aṣṭādhyāyī 3.3.101
Vṛtti Varadarājācārya

इषर्निपातोऽयम्।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

८६६- इच्छा। प्रथमान्तमेकपदम्। स्त्रियां क्तिन् से स्त्रियाम् और भावे इस सूत्र की अनुवृत्ति है।

स्त्रीत्वविशिष्ट भाव अर्थ में 'इच्छा' शब्द का निपातन होता है।

तात्पर्य यह है कि इष् धातु से भाव अर्थ में इच्छा शब्द साधु है।

इच्छा। इषु इच्छायाम्। इष् धातु से भाव अर्थ में इच्छा का निपातन होने से धातु से श प्रत्यय, षकार के स्थान पर इषुगमियमां छः से छकार आदेश, तुक् आगम आदि सभी कार्य निपातनात् सिद्ध होते हैं। साथ ही स्त्रीलिङ्गता का भी निपातन है, जिससे इच्छा बन जाता है। इसकी प्रातिपदिकसंज्ञा करके सु का हल्ड्यादि लोप आदि करके इच्छा, इच्छे, इच्छाः रूप बनते हैं।