Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 34
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VṛttiGovind
LSK 796
खश-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
एजेः खश्
Aṣṭādhyāyī 3.2.28
Vṛtti Varadarājācārya

ण्यन्तादेजे: खश् स्यात्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

७९६- एजे: खश्। एजे: पञ्चम्यन्तं, खश् प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। कर्मण्यण् से कर्मणि की अनुवृत्ति आती है और धातो:, प्रत्यय:, परश्च का अधिकार है।

कर्म उपपद होने पर णिजन्त एज् धातु से खश् प्रत्यय होता है।

खकार की लशक्वतद्धिते से और शकार की हलन्त्यम् से इत्संज्ञा होकर दोनों का तस्य लोपः से लोप होकर अकार ही शेष रहता है। शित् होने के कारण इस अकार की तिङ्शित्सार्वधातुकम् से सार्वधातुकसंज्ञा होकर कर्तरि शप् से शप् आदि होते हैं। खकार की इत्संज्ञा होने के कारण खित् भी है, अतः अग्रिम सूत्र प्रवृत्त होकर मुम् का आगम हो जाता है।