Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 13
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VṛttiGovind
LSK 589
इङ्गदेशविधायकं विधिसूत्रम्
घुमास्थागापाजहातिसां हलि
Aṣṭādhyāyī 6.4.66
Vṛtti Varadarājācārya

एषामात ईत्स्याद्धलादौ क्ङित्यार्धधातुके।

अध्यगीष्ट। अध्यैष्ट। अध्यगीष्यत। अध्यैष्यत।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

५८९- घुमास्थागापाजहातिसां हलि। घुश्च माश्च स्थाश्च गाश्च पाश्च जहातिश्च साश्च तेषामितरेतरद्वन्द्वो घुमास्थागापाजहातिसाः, तेषां घुमास्थागापाजहातिसाम्। घुमास्थागापाजहातिसां षष्ठ्यन्तं, हलि सप्तम्यन्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। दीडो युडचि विडन्ति से विडन्ति की, आतो लोप इटि च से आतः की और ईद्यति से ईत् की अनुवृत्ति आती है। आर्धधातुको का अधिकार है।

घु, मा, स्था, गा, पा, हा (ओहाक्) और सा (षो) धातुओं के आकार के स्थान पर ईकार आदेश होता है हलादि कित्, डित् आर्धधातुक के परे होने पर।

अध्यगीष्ट। अधि-पूर्वक इ-धातु से लुङ् की विवक्षा में विभाषा लुङ्लृङोः से वैकल्पिक गाङ् आदेश करके लुङ्, अट्, त, सिच् करके अधि+अ+गा+स्+त बना। गा से परे जित्, णित् से भिन्न प्रत्यय सिच् वाला सकार है, उसको गाङ्कुटादिभ्योऽञ्णिन् डित् से डिद्वद्भाव हुआ और घुमास्थागापाजहातिसां हलि से गा के आकार के स्थान पर ईकार आदेश होकर अधि+अ+गी+स्+त बना। ईकार से परे सकार को षत्व और षकार से पर तकार को ष्टुत्व करके अधि+अ+गीष्ट बना। अधि+अ में यण् करके अध्यगीष्ट सिद्ध हुआ। गाङ् आदेश न होने के पक्ष में इ धातु के अजादि होने के कारण आडजादीनाम् से आट् का आगम होकर अधि+आ+इ+स्+त बनता है। आ+इ में आटश्च से वृद्धि करके ऐ, अधि+ऐ में यण् होकर अध्यैस्त बना। सकार को षत्व और तकार को ष्टुत्व और वर्णसम्मेलन करके अध्यैष्ट सिद्ध होता है। इस तरह लुङ् में दो-दो रूप बनते हैं।

लुङ् में (गादेशपक्ष में) अध्यगीष्ट, अध्यगीषाताम्, अध्यगीषत, अध्यगीष्ठाः, अध्यगीषाथाम्, अध्यगीढ्वम्, अध्यगीषि, अध्यगीष्वहि, अध्यगीष्महि। गाङ् के अभाव में- अध्यैष्ट, अध्यैषाताम्, अध्यैषत, अध्यैष्ठाः, अध्यैषाथाम्, अध्यैढ्वम्, अध्यैषि, अध्यैष्वहि, अध्यैष्महि।

लृङ् में भी गाङ् आदेश विकल्प से होता है। आदेश के पक्ष में डिद्वद्भाव, ईत्व करके रूप बनते हैं- अध्यगीष्यत, अध्यगीष्येताम्, अध्यगीष्यन्त, अध्यगीष्यथाः, अध्यगीष्येथाम्, अध्यगीष्यध्वम्, अध्यगीष्ये, अध्यगीष्यावहि, अध्यगीष्यामहि। गाङ् न होने के पक्ष में- अध्यैष्यत, अध्यैष्येताम्, अध्यैष्यन्त, अध्यैष्यथाः, अध्यैष्येथाम्, अध्यैष्यध्वम्, अध्यैष्ये, अध्यैष्यावहि, अध्यैष्यामहि।

अब उभयपदी धातुओं का प्रकरण प्रारम्भ होता है।