Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 520
सीयुडागमविधायकं विधिसूत्रम्
लिङस्सीयुट्
Aṣṭādhyāyī 3.4.102
Vṛtti Varadarājācārya

सलोपः। एधेत। एधेयाताम्।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

५२०- लिङः सीयुट्। लिङः षष्ठ्यन्तं, सीयुट् प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्।

लिङ् लकार को सीयुट् आगम होता है।

सीयुट् में टकार की हलन्त्यम् से तथा उकार की उपदेशोऽजनुनासिक इत् से इत्संज्ञा एवं दोनों का तस्य लोपः से लोप होकर केवल सीय् शेष रहता है। टित् होने के कारण लकार के आदि में बैठता है। परस्मैपद में सीयुट् को बाधकर यासुट् परस्मैपदेषूदात्तो डिच्च से यासुट् आगम होता है।

ऐधेत। एध् धातु से विधि आदि अर्थ में लिङ् लकार, त आदेश, शप्, अनुबन्धलोप, एध् अ त बना। लिङः सीयुट् से सीयुट् आगम, अनुबन्धलोप, एध्+अ+सीय्+त बना। सीय् में सकार का लिङः सलोपोऽन्त्यस्य से लोप होकर एध्+अ+ईय्+त बना। यकार का लोपो व्योर्वलि से लोप होता है। वर्णसम्मेलन होने पर एध्+ई त बना। एध्+ई में आद्गुणः से गुण हुआ- एधेत सिद्ध हुआ।

ऐधेयाताम्। एध् धातु से विधि आदि अर्थ में लिङ् लकार, आताम् आदेश, शप्, अनुबन्धलोप, एध्+अ+आताम् बना। लिङः सीयुट् से सीयुट् आगम, अनुबन्धलोप, एध्+अ+सीय्+आताम् बना। सीय् में सकार का लिङः सलोपोऽन्त्यस्य से लोप होकर एध्+अ+ईय्+आताम् बना। वल् परे न होने के कारण यकार का लोपो व्योर्वलि से लोप नहीं होता है। वर्णसम्मेलन होने पर एध्+ईय् आताम् बना। एध्+ई में आद्गुणः से गुण हुआ- एधेय्+आताम्, यकार आकार के साथ मिला- ऐधेयाताम् सिद्ध हुआ।