एषामुपधाया लोपोऽजादौ क्ङिति न त्वङि।
जग्मतुः। जग्मुः। जगमिथ-जगन्थ। जग्मथुः। जग्म। जगाम-जगम।
जग्मिव। जग्मिम। गन्ता।
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५०५- गमहनजनखनघसां लोपः क्ङित्यनङि। गमश्च हनश्च जनश्च खनश्च घस् च तेषामितरेतरद्वन्द्वो गमहनजनखनघसः, तेषां गमहनजनखनघसाम्। क् च ङ् च क्ङौ, क्ङौ इतौ यस्य स क्ङित्, तस्मिन् क्ङिति। न अङ् अनङ्, तस्मिन् अनङि। गमहनजनखनघसां षष्ठ्यन्तं, लोपः प्रथमान्तं, क्ङिति सप्तम्यन्तम्, अनङि सप्तम्यन्तम्, अनेकपदमिदं सूत्रम्। सूत्र में अचि श्नुधातुभ्रुवां य्वोरियङुवङौ से अचि और उदुपधाया गोहः से उपधायाः की अनुवृत्ति आ रही है।
अजादि कित् डित् के परे होने पर गम्, हन्, जन्, खन् और घस् धातु के उपधा का लोप होता है किन्तु डित् भी यदि अङ् वाला हो तो लोप नहीं होगा।
जग्मतुः। गम् धातु से लिट्, तस्, उसके स्थान पर अतुस् आदेश, द्वित्व, हलादिशेष कर के कुहोश्चुः से चुत्व करने के बाद जगम् अतुस् बना। जगम् में गकारोत्तरवर्ती अकार उपधा है, अतः उसका गमहनजनखनघसां लोपः क्ङित्यनडि से लोप हुआ, जगम् अतुस् बना। वर्णसम्मेलन और सकार का रुत्वविसर्ग हुआ- जग्मतुः। इसी प्रकार जग्मुः भी बनेगा।
जगमिथ-जगन्थ। गम् धातु से लिट् लकार का सिप्, उसके स्थान पर थल् आदेश, अनुबन्धलोप, द्वित्व, हलादिशेष करके कुहोश्चुः से चुत्व करके जगम्+थ बना। गम् धातु भी एकाच् उपदेशेऽनुदात्तात् से इट् निषेध होने के कारण अनिट् है। इसलिए इट् प्राप्त नहीं था, फिर भी ऋतो भारद्वाजस्य के नियम से विकल्प से इट् हुआ। इट् के पक्ष में जगम्+इथ में वर्णसम्मेलन होकर जगमिथ बना। उपदेशेऽत्वतः से इट् न होने के पक्ष में जगम्+थ है। नश्चापदान्तस्य इलि से मकार के स्थान पर अनुस्वार और अनुस्वारस्य ययि परसवर्णः से परसवर्ण होकर अनुस्वार के स्थान पर नकार आदेश हुआ तो जगन्थ सिद्ध हुआ।
जग्मथुः। जग्म। इन रूपों को जग्मतुः की तरह साधिए।
जगाम-जगम। उत्तमपुरुष के एकवचन में प्रथमपुरुष की तरह जगाम बनता है किन्तु णलुत्तमो वा से णित्व विकल्प से होने के कारण णित्व के पक्ष में अत उपधाया से वृद्धि होगी, जगाम बनेगा और णित्वाभाव में वृद्धि नहीं होगी, अतः जगम बनेगा।
जग्मिव। जग्मिम। में क्रादिनियम से इट् होता है और जगम् के उपधाभूत अकार का गमहनजनखनघसां लोपः क्ङित्यनडि से लोप होता है। शप प्रक्रिया पूर्ववत् ही है। इस प्रकार से गम् धातु के रूप बने- जगाम, जग्मतुः, जग्मुः, जगमिथ-जगन्थ, जग्मथुः, जग्म, जगाम-जगम, जग्मिव, जग्मिम।
लुट् लकार में भी एकाच् उपदेशेऽनुदात्तात् से निषेध होने से इट् नहीं होगा। गम् के मकार का अनुस्वार और परसवर्ण होकर नकार आदेश होने पर गन्ता बनेगा। गन्ता, गन्तारौ, गन्तारः, गन्तासि, गन्तास्थः, गन्तास्थ, गन्तास्मि, गन्तास्वः, गन्तास्मः।