Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 448
लघुसंज्ञाविधायकं संज्ञासूत्रम्
ह्रस्वं लघु
Aṣṭādhyāyī 1.4.10
Vṛtti Varadarājācārya

आतिष्यत्। षिध गत्याम्॥३॥

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

४४८- ह्रस्वं लघु। ह्रस्वं प्रथमान्तं, लघु प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्।

ह्रस्व अच् लघुसंज्ञक होता है।

ऊकालोऽज्झस्वदीर्घप्लुतः से एकमात्रिक की ह्रस्वसंज्ञा, द्विमात्रिक की दीर्घसंज्ञा और त्रिमात्रिक की प्लुतसंज्ञा का विधान संज्ञाप्रकरण में ही हो चुका है। लघुसंज्ञा का प्रयोजन पुगन्तलघूपधस्य च आदि सूत्रों की प्रवृत्ति है, जो आगे स्पष्ट किया जाएगा।