Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 422
लङ्-लकार-विधायकं विधिसूत्रम्
अनद्यतने लङ्
Aṣṭādhyāyī 3.2.111
Vṛtti Varadarājācārya

अनद्यतनभूतार्थवृत्तेर्धातोर्लङ् स्यात्।

अनद्यतनभूतार्थवृत्तेर्धातोर्लङ् स्यात्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

४२२- अनद्यतने लङ्। अनद्यतने सप्तम्यन्तं, लङ् प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में भूते, धातोः, प्रत्ययः, परश्च का अधिकार है।

अनद्यतन भूतकाल में लङ् लकार होता है।

पहले भी बताया जा चुका है कि जो आज का विषय है, उसे अद्यतन और जो आज का विषय नहीं है, उसे अनद्यतन कहा जाता है। यहाँ पर भूतकाल ऐसा है जो आज का न हो अर्थात् कल, परसों और उसके पहले का हो। ऐसा होने पर लङ्लकार का प्रयोग करना चाहिए। जैसे "आज सुबह मैंने जलपान किया" इस वाक्य में आज का विषय बताया गया है, अतः यहाँ पर लङ् लकार का प्रयोग नहीं होगा।

४२२- अनद्यतने लङ्। अनद्यतने सप्तम्यन्तं, लङ् प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में भूते, धातोः, प्रत्ययः, परश्च का अधिकार है।

अनद्यतन भूतकाल में लङ् लकार होता है।

पहले भी बताया जा चुका है कि जो आज का विषय है, उसे अद्यतन और जो आज का विषय नहीं है, उसे अनद्यतन कहा जाता है। यहाँ पर भूतकाल ऐसा है जो आज का न हो अर्थात् कल, परसों और उसके पहले का हो। ऐसा होने पर लङ्लकार का प्रयोग करना चाहिए। जैसे "आज सुबह मैंने जलपान किया" इस वाक्य में आज का विषय बताया गया है, अतः यहाँ पर लङ् लकार का प्रयोग नहीं होगा।