Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 409
लोट्लकारविधायकं विधिसूत्रम्
लोट् च
Aṣṭādhyāyī 3.3.162
Vṛtti Varadarājācārya

विध्याद्यर्थेषु धातोर्लोट्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

४०९- लोट् च। लोट् प्रथमान्तं, च अव्ययपदं, द्विपदमिदं सूत्रम्। विधिनिमन्त्रणामन्त्रणा-धीष्टसम्प्रश्नप्रार्थनेषु लिङ् पूरे सूत्र का अनुवर्तन होता है।

विधि, निमन्त्रण, आमन्त्रण, अधीष्ट, सम्प्रश्न एवं प्रार्थना इन अर्थों में धातु से लोट् लकार होता है।

विधि आदि के विशेष अर्थ आगे विधिनिमन्त्रणामन्त्रणा-धीष्टसम्प्रश्नप्रार्थनेषु लिङ् में ही स्पष्ट करेंगे।

इस सूत्र के विधान में काल अर्थात् समय से कोई मतलब नहीं है।