Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 390
दीर्घविधायकं विधिसूत्रम्
अतो दीर्घो यञि
Aṣṭādhyāyī 7.3.101
Vṛtti Varadarājācārya

अतोऽङ्गस्य दीर्घो यजादौ सार्वधातुके।

भवामि। भवावः। भवामः। स भवति। तौ भवतः। ते भवन्ति।

त्वं भवसि। युवां भवथः। यूयं भवथ। अहं भवामि। आवां भवावः।

वयं भवामः।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

का विधान, बहुवचन थ आया, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, पुनः शप् की सार्वधातुकसंज्ञा, गुण, अव् आदेश, वर्णसम्मेलन होने के बाद भवथ बना।

३९०- अतो दीर्घो यजि। अतः षष्ठ्यन्तं, दीर्घः प्रथमान्तं, यजि सप्तम्यन्तं, त्रिपदमिदं सूत्रम्। तुरुस्तुशम्यमः सार्वधातुके से सार्वधातुके की अनुवृत्ति आती है। अङ्गस्य का अधिकार है ही।

अदन्त अङ्ग को दीर्घ होता है यज् प्रत्याहार आदि में हो ऐसे सार्वधातुक के परे रहते।

इसके द्वारा भू के बाद किये गये शप् के अकार को दीर्घ होता है। प्रश्न यह हो सकता है कि अङ्गसंज्ञा तो प्रकृति की होती है, यहाँ तो प्रकृति केवल भू है, शप् तो प्रत्यय है। ऐसी स्थिति में शप् को अङ्गसंज्ञक कैसे माना गया? इसका उत्तर यह है शप् केवल प्रत्यय न होकर विकरण भी है। अङ्गसंज्ञा विकरण सहित की भी मानी जायेगी। अतः शप् सहित भू को अङ्ग माना जायेगा। शप् के अकार को इस सूत्र से दीर्घ होगा।

भवामि। भू धातु से अस्मद्युत्तमः से उत्तमपुरुष का विधान, एकवचन मिप्, पकार की इत्संज्ञा होकर लोप, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, पुनः शप् की सार्वधातुकसंज्ञा, गुण, अव् आदेश, वर्णसम्मेलन होने के बाद भव+मि बना। मि यजादि सार्वधातुक है, अतः अतो दीर्घो यजि से भव के अकार को दीर्घ हुआ- भवामि।

भवावः। भू धातु से अस्मद्युत्तमः से उत्तमपुरुष का विधान, द्विवचन वस्, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, पुनः शप् की सार्वधातुकसंज्ञा, गुण, अव् आदेश, वर्णसम्मेलन होने के बाद भव+वस् बना। वस् यजादि सार्वधातुक है, अतः अतो दीर्घो यजि से भव के अकार को दीर्घ हुआ- भवावस् बना, सकार को रुत्वविसर्ग हुआ- भवावः।

भवामः। भू धातु से अस्मद्युत्तमः से उत्तमपुरुष का विधान हुआ, बहुवचन मस् आया, उसकी सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, पुनः शप् की सार्वधातुकसंज्ञा, गुण, अव् आदेश, वर्णसम्मेलन होकर भव+मस् बना। मस् यजादि सार्वधातुक है, अतः अतो दीर्घो यजि से भव के अकार को दीर्घ, भवामस् बना, सकार को रुत्वविसर्ग हुआ- भवामः।

भू धातु के लट् लकार के रूप

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथमपुरुष

भवति

भवतः

भवन्ति।

मध्यमपुरुष

भवसि

भवथः

भवथ।

उत्तमपुरुष

भवामि

भवावः

भवामः।