Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 385
प्रथमपुरुषविधायकं विधिसूत्रम्
शेषे प्रथमः
Aṣṭādhyāyī 1.4.108
Vṛtti Varadarājācārya

मध्यमोत्तमयोरविषये प्रथमः स्यात्। भू ति इति जाते।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

३८५- शेषे प्रथमः। शेषे सप्तम्यन्तं, प्रथमः प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्।

उत्तमपुरुष और मध्यमपुरुष का विषय न होने पर प्रथमपुरुष होता है।

उत्तमपुरुष और मध्यमपुरुष के लिए प्रयोग होने में जो कारण बताये गये, उससे भिन्न शेष हुआ अर्थात् उक्तादन्यः शेषः। इसके पूर्व दो सूत्रों के द्वारा कथित कारणों के अतिरिक्त अन्य किसी भी स्थिति में प्रथमपुरुष का प्रयोग होना चाहिए। इस प्रकार से इन तीन सूत्रों से जो व्यवस्था दी गई, वह यह कि युष्मत्-शब्द के प्रयोग या प्रयोग की विवक्षा में मध्यमपुरुष, अस्मत्-शब्द के प्रयोग या प्रयोग की विवक्षा होने पर उत्तमपुरुष और शेष सर्वत्र प्रथमपुरुष का प्रयोग होता है।