Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 40
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VṛttiGovind
LSK 947
नकारलोपविधायकं विधिसूत्रम्
नलोपो नञः
Aṣṭādhyāyī 6.3.73
Vṛtti Varadarājācārya

नञो नस्य लोप उत्तरपदे। न ब्राह्मणः अब्राह्मणः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१४७- नलोपो नञः। नलोपः प्रथमान्तं, नञः षष्ठ्यन्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में अलुगुत्तरपदे से उत्तरपदे की अनुवृत्ति आती है।

उत्तरपद के परे होने पर नञ् के नकार का लोप होता है।

अब्राह्मणः। ब्राह्मण से भिन्न ब्राह्मण जैसा क्षत्रिय आदि। न ब्राह्मणः लौकिक विग्रह और न+ब्राह्मण सु अलौकिक विग्रह है। इसमें नञ् सूत्र से समास हुआ, प्रातिपदिकसंज्ञा, विभक्ति का लुक् करके न+ब्राह्मण बना। न की उपसर्जनसंज्ञा और पूर्वप्रयोग। नलोपो नञः

से ब्राह्मण इस उत्तरपद के परे होने पर न के नकार का लोप हुआ, अ+ब्राह्मण=अब्राह्मण बना। सु आदि कार्य करके अब्राह्मणः सिद्ध हुआ।