Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 34
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VṛttiGovind
LSK 823
मकारादेशविधायकं विधिसूत्रम्
क्षायो मः
Aṣṭādhyāyī 8.2.53
Vṛtti Varadarājācārya

क्षामः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

८२३- क्षायो मः। क्षायः पञ्चम्यन्तं, मः प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्। रदाभ्यां निष्ठातो नः पूर्वस्य च दः से निष्ठातः की अनुवृत्ति आती है।

क्षै धातु से परे निष्ठा के तकार के स्थान पर मकार आदेश होता है।

क्षामः। क्षीण हुआ, कमजोर। क्षै क्षये। क्षै धातु से क्त प्रत्यय की विवक्षा में आदेच उपदेशेऽशिति से आत्त्व करके क्षा होने पर निष्ठा सूत्र से क्त प्रत्यय, ककार का लोप, क्षा+त बना। क्षायो मः से तकार के स्थान पर मकार आदेश होकर क्षा+म बना। इसकी प्रातिपदिकसंज्ञा, रुत्वविसर्ग करके क्षामः सिद्ध हुआ। क्तवतु प्रत्यय में भी मत्व होकर क्षामवान् बनता है।