Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 13
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VṛttiGovind
LSK 554
षत्वविधायकं विधिसूत्रम्
शासिवसिघसीनां च
Aṣṭādhyāyī 8.3.60
Vṛtti Varadarājācārya

इण्कुभ्यां परस्यैषां सस्य षः स्यात्। घस्य चर्त्वम्।

जक्षतुः। जक्षुः। जघसिथ। जक्षथुः। जक्ष। जघास, जघस। जक्षिव।

जक्षिम। आद। आदतुः। आदुः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

अद्+अन्त्+इ=अदन्ति बन जाता है। सिप्, थस्, थ में अद् के दकार को खरि च से चर्त्व होगा। मिप्, वस्, मस् में खर् परे न मिलने के कारण चर्त्व नहीं होगा। इस प्रकार से अद् धातु के लट्-लकार में रूप बनते हैं- अत्ति, अत्तः, अदन्ति। अत्सि, अत्थः अत्थ। अद्मि, अद्वः, अद्मः। ५५३- लिट्यन्यतरस्याम्। लिटि सप्तम्यन्तम्, अन्यतरस्याम् सप्तम्यन्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में अदो जग्धिर्ल्यप्ति किति से अदः की तथा लुङ्सनोर्घस्लृ से घस्लृ की अनुवृत्ति आती है।

लिट् लकार के परे होने पर अद् धातु के स्थान पर विकल्प से घस्लृ आदेश होता है।

घस्लृ में लृकार की उपदेशेऽजनुनासिक इत् से इत्संज्ञा होने पर घस् बचता है।

जघास। अद् धातु से लिट्-लकार, तिप् आदेश, उसके स्थान पर णल् आदेश, अनुबन्धलोप, अद्+अ बना। लिट्यन्यतरस्याम् से घस्लृ आदेश हुआ, घस्+अ बना। घस् को लिटि धातोरनभ्यासस्य से द्वित्व हुआ, घस्घस्+अ बना, हलादिशेष हुआ, घस्घस्+अ बना। कुहोश्चुः से चुत्व होकर अभ्यास के घकार के स्थान पर झकार और अभ्यासे चर्च से जश्त्व होकर जकार हो गया, जघस्+अ बना। अत उपधायाः से उपधासंज्ञक घकारोत्तरवर्ती अकार की वृद्धि, जघास्+अ बना, वर्णसम्मेलन हुआ- जघास।

५५४- शासिवसिघसीनां च। शासिश्च वसिश्च घसिश्च तेषामितरेतरद्वन्द्वः शासिवसिघसयः, तेषां शासिवसिघसीनाम्। शासिवसिघसीनां षष्ठ्यन्तं, च अव्ययपदं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में इण्कोः का अधिकार है और अपदान्तस्य मूर्धन्यः से मूर्धन्यः की अनुवृत्ति आती है।

इण् और कवर्ग से परे शास्, वस् और घस् धातु के सकार के स्थान पर षकार आदेश होता है।

आदेश या प्रत्यय का अवयव सकार न होने के कारण आदेशप्रत्यययोः से षत्व प्राप्त नहीं हो रहा था तो इस सूत्र को बनाया गया।

जक्षतुः। अद् धातु से लिट्, तस्, अतुस्, घस्लृ आदेश, उसको द्वित्व, हलादिशेष, चुत्व और चर्त्व होकर जघस्+अतुस् बना। गमहनजनखनघसां लोपः विङ्त्यनङि से उपधाभूत घकारोत्तरवर्ती अकार का लोप, जघस्+अतुस् बना, सकार के स्थान पर शासिवसिघसीनां च से षत्व हुआ, जघस्+अतुस् बना। षकार के परे होने पर घकार के स्थान पर खरि च से चर्त्व होकर ककार आदेश हुआ, जक्ष्+अतुस् बना। क् और ष् का संयोग होने पर क्ष् बनता है, अतः